पृथ्वी की निगरानी में लाएगा क्रांतिकारी बदलाव
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✅ लॉन्च दिनांक: 30 जुलाई 2025
✅ स्थान: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
✅ रॉकेट: GSLV-F16
✅ मिशन लागत: 1.5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹12,500 करोड़)
✅ कक्षा: सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट (747 किमी ऊंचाई पर)
✅ मिशन अवधि: 5 वर्ष
❓ प्रश्न 1: निसार सैटेलाइट क्या है?
🔹 उत्तर:
निसार का पूरा नाम है NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar (NISAR).
यह अमेरिका की NASA और भारत की ISRO द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया एक शक्तिशाली पृथ्वी निगरानी सैटेलाइट है।
इसकी सबसे खास बात है कि यह बादलों, जंगलों, धुएं और अंधेरे में भी देखने की क्षमता रखता है।
📌 यह हर 97 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है और 12 दिन में 1173 चक्कर लगाकर पूरी पृथ्वी का नक्शा तैयार कर सकता है।
❓ प्रश्न 2: निसार मिशन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
🔹 उत्तर:
निसार सैटेलाइट मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों की निगरानी करेगा:
- धरती और बर्फ के बदलाव – जैसे ज़मीन का धंसना, ग्लेशियर्स का पिघलना
- जैविक पारिस्थितिकी तंत्र – जंगल, खेत, नदियाँ आदि
- समुद्री गतिविधियाँ – लहरें, समुद्र में होने वाले बदलाव
🌍 यह जानकारी जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, और पर्यावरण की स्थिति को समझने में मदद करेगी।
🔓 इसका डेटा ओपन-सोर्स होगा यानी कोई भी इसे मुफ्त में इस्तेमाल कर सकता है।
❓ प्रश्न 3: निसार पारंपरिक सैटेलाइट्स से कैसे अलग है?
🔹 उत्तर:
पारंपरिक सैटेलाइट मौसम या बादलों की वजह से साफ जानकारी नहीं दे पाते।
लेकिन निसार हर मौसम में काम करता है और मिलीमीटर स्तर के बदलाव भी पकड़ सकता है।
🌐 यह लगभग रियल-टाइम डेटा देगा।
❓ प्रश्न 4: निसार सैटेलाइट कैसे काम करता है?
🔹 उत्तर:
इसमें एक 12 मीटर गोल्ड प्लेटेड रडार एंटीना होता है जो 9 मीटर लंबी बूम पर लगा होता है।
यह एंटीना माइक्रोवेव सिग्नल्स भेजता और ग्रहण करता है, जिससे धरती की स्थिति की जानकारी मिलती है।
🛰️ यह दो प्रकार के रडार तकनीक का उपयोग करता है:
- L-बैंड (NASA): 24 सेमी वेवलेंथ – घने जंगलों में भी देख सकता है
- S-बैंड (ISRO): 9 सेमी वेवलेंथ – बारीक बदलाव पकड़ सकता है
📊 यह धरती के 10 से 15 सेमी तक के बदलावों को रंगों के ज़रिए दिखाता है:
- 🟢 हरा: ज़मीन ऊपर उठी
- 🔴 लाल: 15 सेमी ऊपर उठी
- 🔵 नीला: नीचे धंसी
- 🟣 पर्पल: 10 सेमी नीचे गई
❓ प्रश्न 5: निसार मिशन को कितने चरणों में बांटा गया है?
🔹 उत्तर:
निसार मिशन को 4 मुख्य चरणों में बांटा गया है:
1️⃣ लॉन्च चरण
- 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा से GSLV-F16 के द्वारा लॉन्च
2️⃣ डिप्लॉयमेंट चरण
- 12 मीटर रडार एंटीना को अंतरिक्ष में सही तरह से फैलाना
- NASA के JPL द्वारा डिजाइन किया गया
3️⃣ कमीशनिंग चरण
- पहले 90 दिन सैटेलाइट के हर सिस्टम की जांच
- सभी उपकरणों और पेलोड्स का परीक्षण होगा
4️⃣ साइंस ऑपरेशन चरण
- असली डेटा इकट्ठा करने और धरती की निगरानी का काम शुरू होगा
- समय-समय पर कक्षा में सुधार (मैन्युवर) किया जाएगा




